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सैलाब से सीधा मुकाबला, मौत के वो 3 मिनट

मध्य प्रदेश में मौत का पिकनिक
ये खुलासा उस नए वीडियो से होगा जो अब सामने आया है. करीब 7 दिन बाद सामने आए इस वीडियो से साफ है कि सुल्तानगढ़ झरने की चट्टान पर पिकनिक मना रहे लोगों को इस बात की भनक भी नहीं लग पाई कि उसने पीछे पानी की शक्ल में कयामत आ रही है.
15 अगस्त 2018
छुट्टी का दिन था. शाम का वक़्त. शिवपुरी के सुल्तानगढ़ झरने में सैकड़ों लोग इस चट्टान पर बैठ कर ज़िंदगी के मज़े ले रहे थे. इस बात से अनजान की सैलाब आने वाला है. शिवपुरी में पार्वती नदी का ये वो इलाका है जो पहाड़ियों से गुज़रता है. अक्सर यहां तक आते आते नदी सूख जाती है. इलाके के लोगों के लिए ये बेहतरीन पिकनिक स्पॉट बन जाता है. उस रोज़ भी यहां पानी ना के बारबर था. लोग मस्ती कर रहे थे कि अचानक नदी में पानी आना शुरू हो गया.
बहुत तेजी से आया पानी
पहले थोड़ा पानी आया. फिर और पानी आया. जिन्हें खतरे की आहट हो गई वो फौरन किनारे की तरफ भागने लगे. तस्वीरें देखिए ये करीब आधा दर्जन लोग एक दूसरे का हाथ पकड़ कर किनारे की तरफ बढ़ चले. बीच रास्ते में इनका एक साथी पानी की धार में फिसल गया. मगर इसने अकलमंदी दिखाई और पत्थर के एक कोने को मज़बूती से पकड़ लिया.
एक तरफ तो पानी की धार से जूझ रहा था वहीं दूसरी तरफ उसके ठीक सामने. करीब आधा दर्जन लोग अभी भी ये समझ नहीं पा रहे थे कि मामला गंभीर होने वाला है. फिर उनमें से दो लोगों ने फुर्ती दिखाई और किनारे की तरफ बढ़ने लगे. आते आते इन लोगों ने उस शख्स का हाथ भी पकड़कर उसके खींच लिया जो पानी की धार से बाहर निकलने के लिए जूझ रहा था.
एक एक करके सारे लोग किनारे की तरफ भागने लगे मगर ये शख्स अकेले ही पानी से होते हुए किनारे की तरफ भागने की कोशिश करने लगा. मगर पानी के सैलाब ने उसे संभलने नहीं दिया. पहले वो फिसला. फिर गिरा. मगर किसी तरह उसने हालात पर काबू पाया और किनारे पर आकर अपनी जान बचा ली.
लेकिन अभी भी करीब कई लोग सैलाब के बीचो बीच फंसे हुए थे. जिनके लिए अब इस तरह दौड़कर या चलकर इस सैलाब को पार कर पाना नामुमकिन सा हो गया था. पानी और उसकी रफ्तार दोनों बढने लगी. पार्वती नदी पर अभी तक जो पत्थर दिखाई दे रहे थे वो भी पानी में डूब गए. सैलाब पूरी तरह से आ गया. एक एक करके लोग बहने लगे. अब किसी के लिए कुछ करने का मौका ही नहीं बचा. इनके पास अब दो ही रास्ते थे. या तो सैलाब के सामने सरेंडर कर दें. या फिर लड़ें मौत से.
सैलाब में फंसी 45 लोगों की जिंदगियां
इस सैलाब के सामने सरेंडर करने का मतलब सिर्फ मौत था. 45 लोग फंसे हुए थे. फंसे हुए थे और इंतजार कर रहे थे कि किसी तरह सैलाब का गुस्सा कम हो और वो किनारे पहुंच जाएं. या फिर कोई उन्हें बचाने आ जाए. मगर वक्त कम था और पानी का बहाव हर पल तेज होता जा रहा था. सब कुछ बहा ले जाने को बेताब इस पानी में बिना तैयारी के किसी को बचाने की कोशिश करना भी खुदकुशी से कम नहीं था.
सोचिए पानी का सैलाब और करीब 45 लोगों के लिए जान बचाने को सिर्फ ये चट्टान. हाथ की पकड़ इतनी भी मज़बूत नहीं हो सकती जो पानी की इस बहाव में भी पकड़ कायम रखे. एक एक करके हाथ छूट रहे थे. पहले कोई गिरा. फिर कोई. और फिर तो एक के बाद एक का सिलसिला शुरू हो गया. इस तरह 12 लोग बह गए.
सैलाब के जो इधर खड़े थे वो इधर. और जो उधर खड़े थे उधर. हाथ मलते रह गए. कौन भला हिम्मत करेगा इस सैलाब में उतरकर किसी जान बचाने की. क्योंकि इसमें उतरने का मतलब ही जान गंवाना है. उन तक पहुंचना तो खैर बहुत बाद की बात है.
सैलाब में मौत से सीधा मुकाबला
पानी का इतना तेज़ बहाव जो भारी से भारी चीज को भी अपने साथ बहा ले जाए. वो तो इन लोगों की फौलाद जैसी इच्छा शक्ति है. जो ये लोग लहरों के बीच मौत से मुकाबला कर रहे हैं. सैलाब जो सबकुछ बहा ले जाने को बेताब है वो क्या इतना इंतज़ार करेगा कि इन्हें बचाने को रस्सी आ जाए. या प्रशासन पहुंच पाए. क्योंकि अब वक्त बहुत कम बचा है. जब तक इनकी इच्छा शक्ति कायम है तब तक ही इनकी सांसें चल सकती हैं. वरना किसी भी पल इस सैलाब में समा जाती 45 ज़िंदगियां.

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